मंगलवार, 8 फ़रवरी 2011

रक्त हीन क्रांति १६८८  में एक बाहरी राजकुमार अवाम सेना की सहायता से इंग्लॅण्ड वासियों ने अपना संवैधानिक अधिकार पाया. इस कारण इसका महत्व रहा और इसे राष्ट्रीय क्रांति मना गया. इसी प्रकार मग्नेकार्टा (१२१५) वास्तव में सामंतों द्वारा अपने अधिकारों की  सुरक्षा के लिए प्राप्त किया गया अधिकार मात्र था. इसे अंग्रेजी स्वतंत्रता की आधारशिला और संविधान की बाइबल   मना गया. १७८९ की फ़्रांसिसी क्रांति  सामन्तवादी वर्ग द्वारा राजा की निरंकुशता पर नियंत्रण की कहानी है, पर इसे राष्ट्रीयता और लोकतंत्र का जनक मना जाता है. १७७३ का अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम मातृ    शक्तियों एवं औपनिवेशिक ताकतों में टकराव की कथा है, फिर भी इसका अंतर्राष्ट्रीय महत्व है. ये सारी क्रांतियाँ सफल रहीं, इस कारण इनका महत्व रहा, किन्तु १८५७ की क्रांति असफल रही. असफलता के बावजूद ईस्ट इंडिया कंपनी की सत्ता में परिवर्तन, भविष्य के राष्ट्रीय आन्दोलन में प्रेरक की भूमिका आदि ने १८५७ की क्रांति के स्वरूप को राष्ट्रीय बना दिया.
           सन्दर्भ स्रोत:
१. गिरि राजीव रंजन, १८५७- विरासत से जिरह, सामयिक बुक्स, नई दिल्ली, २०९९, पृष्ठ ६१ 
२. स्ट्रेची जौन, इंडिया-फर्स्ट एडमिनिसट्रेशन   एंड प्रोग्रेस, पीएस  से अयोध्या सिंह कृत भारत का मुक्ति संग्राम से उद्धृत. 
३. सीले जे.आर,दी  इक्सपेनशन  ऑफ़ इंग्लॅण्ड, लन्दन, १८८३, पृष्ठ २८
४. देसाई ए.आर., भारतीय राष्ट्रवाद की सामजिक पृष्ठभूमि, माकमिलन इंडिया लिमिटेड, नई दिल्ली, १९९१, पृष्ट-१
५.  तत्रैव, पृष्ठ-२ 
६.  तत्रैव, पृष्ठ-५
७. सेन एस.एन. १८५७ का स्वतंत्रता संग्राम, अनुवाद इरफ़ान, प्रकाशन विभाग, नई दिल्ली, १९९८, पृष्ठ-६८ 
८. सुन्दर लाल, भारत में अंग्रेजी राज, भाग -२,   प्रकाशन विभाग, नई दिल्ली, २०००, पृष्ठ-३०६ 
९.रसेल डब्लू. एच., माई डायरी इन इंडिया इन द   ईयर आफ १८५८-५९, लन्दन, १९०५, पृष्ठ-१६४
१०. मैकार्थी जस्टिन, हिस्ट्री ऑफ़ ओन टाइम्स, वोल्यूम -तीन  से हरदास बाल शास्त्री  की आर्म्ड स्ट्रगल फॉर फ्रीडम १८५७-१९४७, काल प्रकाशन,पूने, १९५८, पृष्ठ-१३-१४, पर उद्धृत 
११. नेहरू जे.एल. द डिस्कवरी ऑफ इंडिया, द शीनेस्त प्रेस, कोलकाता, १९३६, पृष्ठ-२७९
१२. सावरकर बी.डी., द इंडियन वार ऑफ इन्देपेंदेंस, फ़ोन निवास, पब्लिकाशन, मुम्बई, १९४७, पृष्ठ-८ 
१३. शुक्ल आर.एल., आधुनिक भारत का इतिहास, हिंदी माध्यम कार्यान्वयन निदेशालय, नई दिल्ली, २००१, पृष्ठ-२४०
१४. १५. और १६. हंस ईड़, तृतीय सेरिज,ई.एक्स.एल.४,जून-जूली, १८५७ से मित्तल एस.सी. कृत, १८५७ का स्वतंत्रता समर-एक पुनरवलोकन, भारतीय इतिहास समिति, नई दिल्ली, २००० के पृष्ठ-६-७ पर उद्धृत 
१७.ट्रेविलियन गी.ओ. द लाइफ एंड लेटर्स ऑफ लॉर्ड मेकाले, पार्ट सेकेण्ड, लन्दन, १८७६, पृष्ठ-४४७
१८. जौन अर्नेस्ट, ५ सितम्बर १८५७, पीपुल्स पेपर  ऑन-इंडियन स्ट्रगल
१९. मार्क्स, द फर्स्ट इंडियन वार इनडेपेनडेंस , विदेशी भाषा प्रकाशन समूह, मास्को, १८५७-५९, पृष्ठ-४१-४२
२०. सुन्दरलाल, पूर्वोक्त, पृष्ठ-३१७
२१. विल्सन जे.सी., कम्प्लीट हिस्ट्री और द ग्रेट सिपाही वार, पृष्ठ-१७ से  सुन्दरलाल, पूर्वोक्त, पृष्ठ-३१३ 
२२. अयोध्या सिंह, पूर्वोक्त, पृष्ठ-३०८-३०९ 
२३.  सुन्दरलाल, पूर्वोक्त, पृष्ठ-३१२
२४. सेन सुरेन्द्रनाथ, पूर्वोक्त, पृष्ठ-६६
२५. सुन्दरलाल, पूर्वोक्त, पृष्ठ-३१२ 
२६. सुन्दरलाल, पूर्वोक्त, पृष्ठ-३१३ 
२७.  सुन्दरलाल, पूर्वोक्त, पृष्ठ-३१३ 
२८. रानाडे प्रतिभा, झाँसी की रानी लक्ष्मी बी, अनुवाद-गोविन्द गुंठे, नेशनल बुक त्रस्त, इंडिया, २००८, पृष्ठ-१९ 
२९. तत्रैव, पृष्ठ-१९ 
३०.  तत्रैव, पृष्ठ-१५
३१. बेल चार्ल्स, म्युटिनी पार्ट-१, पृष्ठ-४०
३२.  सेन सुरेन्द्रनाथ, पूर्वोक्त, पृष्ठ-५
३३. रानाडे प्रतिभा, पूर्वोक्त, पृष्ठ-१८
३४.  सुन्दरलाल, पूर्वोक्त, पृष्ठ-३०७
३५. गिरि राजीव रंजन, पूर्वोक्त, पृष्ठ-६९ 
३६.रानाडे प्रतिभा, पूर्वोक्त, पृष्ठ-३५
३७.गिरि राजीव रंजन, पूर्वोक्त, पृष्ठ-७२
३८. गिरि राजीव रंजन, पूर्वोक्त, पृष्ठ-७२-७३
३९. सुन्दरलाल, पूर्वोक्त, पृष्ठ-३२१
४०. शुक्ल रामलखन(संपादित), पूर्वोक्त, पृष्ठ-२५० 
४१. तत्रैव, पृष्ठ-२५३
४२.  तत्रैव, पृष्ठ-२५४

मैं लगा था उनकी जिन्दगी सुलझाने में/
और मेरी जिन्दगी ही उलझती चली गई /
चाहा था कि हर मोड़ पर राह दिखला दूं/
मेरे साथ मेरी राह भी भटकती चली गई/

जय कुमार झाजी, अहां के धन्यवाद.....अगला शेर है- अच्छी लगती है उलझन भरी जिन्दगी/वो किसी के काम तो  आती चली गई


जोहार
खेल प्रेमियो!!!! 
स्वागत है
भारतीय ओलिम्पिक टीम के प्रथम कप्तान
जयपाल सिंह मुंडा
की पावन धरती पर




२.
खेलों  का मेला
खिलाडियों की जमघट!!!!!!!
स्वागत है
खेल के प्रेमियों का
खेल-खिलाडियों की धरती
झारखण्ड
३.
खिलाड़ियों का रेला
खेलों का मेला
खेल प्रेमियों का
हृदय से ज़ोहार
स्नेह के फूलों से  स्वागत
खेल के राष्ट्रीय महासंग्राम में 
३४वां राष्ट्रीय खेल २०११


खेल का महाकुम्भ:खेल प्रेमियों का रेला

स्वागत है
खिलाड़ियों का
खेल प्रेमियों का

खेल का महा संग्राम : खेल प्रेमियों का महा पर्व 
स्वागत है
खिलाड़ियों का
खेल प्रेमियों का

खेल का महा संग्राम: निमंत्रण आपको आने का
सुस्वागतम

सुस्वागतम
खेल में उमड़ता जोश: अदम्य उत्साह रोमांच

सुस्वागतम
आएं  देखें , खेलों में खो जाएँ
खिलाड़ियों में उत्साह जगाएँ